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एक महान अमर बलिदानी विरांगना श्रीमती नीरा आर्य....की महागाथा जिसे पढ़कर आपके रोगंटे खड़े हो जाएंगे आपका हृदय झकझोर देगा ...... आजादी के लिए हमारे देश के वीर विरांगनाओं ने अपना खून अपनी जवानी को बलि वेदी पर चढ़ाया है तब जाके आजादी आई है ।🚩🙏

एक ऐसी घटना, जिसे सुन कायदे से महात्मा और कथित चाचा से घिन हो जाएगी, क्योंकि सुभाष अंग्रेजों की आंखों में गड़ते थे और उनके गायब होने से यही दोनों खूब फले फुले!! एक बेसहारा, लावारिस और अनजान के रूप में हुई एक मृत्यु का दर्दनाक सच!!!          एक थी श्रीमती नीरा आर्य (०५-०३-१९०२ / २६-०७-१९९८) - नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रक्षा के लिए इस बहादुर महिला जिसका अपना "स्तन" काट दिया गया! ( मैं स्पष्ट लिखने के लिए सभी से क्षमा चाहूँगा) उन्होंने श्रीकोंत जोइरोंजोन दास से शादी की, जो ब्रिटिश पुलिस में एक सीआईडी ​​इंस्पेक्टर थे। जबकि नीरा आर्य एक सच्ची राष्ट्रवादी थी, उनके पति एक सच्चे ब्रिटिश नौकर थे। देशभक्त होने के नाते नीरा सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली भारतीय राष्ट्रीय सेना की झांसी रेजिमेंट में शामिल हुईं। नीरा के पति इंस्पेक्टर श्रीकांत जोइरोंजोन दास सुभाष चंद्र बोस की जासूसी कर रहे थे और जोइरोंजोन दास ने एक बार बोस पर गोलियां चला दीं लेकिन सौभाग्य से बोस बाल-बाल बच गए। सुभाष बोस को बचाने के लिए नीरा ने अपने पति की चाकू मारकर हत्या कर दी।    ...
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मेरे घर में तिलक हटाकर आओ: संगीतकार एआर रहमान की अम्मी ने जब गीतकार से हिंदू चिह्न हटाने को कहा...

संगीतकार एआर रहमान (A R Rehman) के परिवार को लेकर तमिल गीतकार पिरईसूदन (Piraisoodan) ने एक हैरान करने वाला  खुलासा किया है।  इससे पता चलता है कि रहमान का परिवार हिंदू चिह्नों व सभ्यता के प्रति कितना असहिष्णु है। अपने साथ हुई घटना को याद करते हुए कवि व गीतकार पिरईसूदन ने बताया कि वे एक सरकारी कार्यक्रम में रहमान से मिले। वहाँ रहमान को उन्हें देख कर याद आया कि उन लोगों ने कैसे बीते समय में एक साथ काम किया था। गीतकार पिरईसूदन के अनुसार, इसी कार्यक्रम में रहमान ने उन्हें पुरानी यादें और साथ को तरोताजा करने के लिए अपने घर आकर गाना लिखने को आमंत्रित किया । लेकिन जब पिरईसूदन रहमान के घर गए तो उनकी अम्मी ने उन्हें घर में विभूति और कुमकुम तिलक न लगाकर आने को कहा। इसे सुनते ही पिरईसूदन ने अपने माथे से धार्मिक चिह्नों को हटाने से मना कर दिया। गौरतलब है कि हिंदू धर्म में विभूति और कुमकुम माथे पर लगाया जाता है। खासकर दक्षिण भारत में तो हर हिंदू के माथे पर ये चिह्न देखने को मिलते हैं। ऐसे में पिरई के लिए रहमान की अम्मी के शब्द किसी धक्के से कम नहीं थे। यहाँ बता दें कि  एआर ...

पाकिस्तानी सैनिको को धूल चटाने वाले एक आम आदमी के साहस और देशभक्ति की अनोखी रियल कहानी .....!

अजय देवगन की एक फ़िल्म आने वाली है, जिसका नाम है— 'भुज - the pride of India' इसमें संजय दत्त एक किरदार निभा रहे हैं, रणछोड़दास रबारी 'पागी' का। इनके बारे में कम लोग ही जानते हैं। फोटो में जो वृद्ध रबारी है, वास्तव में ये एक सेना का सबसे बड़ा राजदार था। 2008 फील्ड मार्शल मानेक शॉ वेलिंगटन अस्पताल, तमिलनाडु में भर्ती थे। गम्भीर अस्वस्थता तथा अर्धमूर्छित अवस्था में वे एक नाम अक्सर लेते थे - 'पागी-पागी', डाक्टरों ने एक दिन पूछ ही लिया “Sir, who is this Paagi?” सैम साहब ने खुद ही brief किया- 1971 का भारत युद्ध जीत चुका था, जनरल मानेक शॉ ढाका में थे। आदेश दिया कि पागी को बुलवाओ, dinner आज उसके साथ करूँगा। हेलिकॉप्टर भेजा गया। हेलिकॉप्टर पर सवार होते समय पागी की एक थैली नीचे रह गई, जिसे उठाने के लिए हेलिकॉप्टर वापस उतारा गया। अधिकारियों ने नियमानुसार हेलिकॉप्टर में रखने से पहले थैली खोलकर देखी, तो दंग रह गए। क्योंकि उसमें दो रोटी, प्याज तथा बेसन का एक पकवान (गाठिया) भर था। Dinner में एक रोटी सैम साहब ने खाई एवं दूसरी पागी ने। उत्तर गुजरात के 'स...

क्या आप जानते हैं कि विश्वप्रसिद्ध नालन्दा विश्वविद्यालय को जलाने वाले जेहादी बख्तियार खिलजी की मौत कैसे हुई थी...???

क्या आप जानते हैं कि विश्वप्रसिद्ध नालन्दा विश्वविद्यालय को जलाने वाले जेहादी बख्तियार खिलजी की मौत कैसे हुई थी...??? असल में ये कहानी है सन 1206 ईसवी की...! 1206 ईसवी में कामरूप में एक जोशीली आवाज गूंजती है... "बख्तियार खिलज़ी तू ज्ञान के मंदिर नालंदा को जलाकर कामरूप (असम) की धरती पर आया है... अगर तू और तेरा एक भी सिपाही ब्रह्मपुत्र को पार कर सका तो मां चंडी (कामातेश्वरी) की सौगंध मैं जीते-जी अग्नि समाधि ले लूंगा"... राजा पृथु और , उसके बाद 27 मार्च 1206 को असम की धरती पर एक ऐसी लड़ाई लड़ी गई जो मानव अस्मिता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है. एक ऐसी लड़ाई जिसमें किसी फौज़ के फौज़ी लड़ने आए तो 12 हज़ार हों और जिन्दा बचे सिर्फ 100.... जिन लोगों ने युद्धों के इतिहास को पढ़ा है वे जानते हैं कि जब कोई दो फौज़ लड़ती है तो कोई एक फौज़ या तो बीच में ही हार मान कर भाग जाती है या समर्पण करती है... लेकिन, इस लड़ाई में 12 हज़ार सैनिक लड़े और बचे सिर्फ 100 वो भी घायल....  ऐसी मिसाल दुनिया भर के इतिहास में संभवतः कोई नहीं.... आज भी गुवाहाटी के पास वो शिलालेख मौजूद है जिस पर इस लड़ाई के...

धौलावीरा को यूनेस्को ने घोषित किया विश्व विरासत स्थल....!

तेलंगाना के 13वीं सदी के रामप्पा मंदिर को यूनेस्को की ओर से वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिलने के बाद अब भारत की एक और धरोहर को सम्मान मिला है। यूनेस्को ने मंगलवार को गुजरात में स्थित धोलावीरा को भी वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया है। धोलावीरा में हड़प्पा सभ्यता के अवशेष पाए जाते हैं, जो दुनिया भर में अपनी अनूठी विरासत के तौर पर मशहूर हैं। धोलावीरा गुजरात में कच्छ प्रदेश के खडीर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है, जो लगभग पांच हजार साल पहले विश्व का प्राचीन महानगर था। हड़प्पा सभ्यता के पुरास्थलों में एक नवीन कड़ी के रूप में जुड़ने वाला पुरास्थल धौलावीरा 'कच्छ के रण' के मध्य स्थित द्वीप 'खडीर' में स्थित है।  मंगलवार को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी के 44वें सेशन में धोलावीरा को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का टैग दिए जाने का फैसला लिया गया। इससे पहले रविवार को तेलंगाना के रामप्पा मंदिर को भी यही दर्जा मिला था। रामप्पा मंदिर को काकात्य वंश के राजाओं ने बनवाया था। इसके साथ ही अब भारत में कुल ऐसी 40 साइट्स हैं, जिन्हें वर्ल्ड हेरिटेज का टैग मिल चुका है। यूनेस्कों के मुताबि...

वामपंथी इतिहासकारों पर महाराणा की जीत🚩🚩

एक बार फिर से यह सिद्ध हो गया है कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप विजयी हुए थे और अकबर को हार का सामना करना पड़ा था। अकबर को ‘महान’ बनाने के लिए वामपंथी और मुस्लिम इतिहासकारों ने उसे विजेता बता कर देश के साथ धोखा किया अपने देश के वामपंथी और मुस्लिम इतिहासकारों के कारण आज भी हल्दीघाटी के युद्ध में विजय को लेकर परस्पर विरोधी मत उभरते हैं। दरअसल, इसे बड़ी और छोटी ताकत की भिड़ंत जैसा युद्ध कहा जाता है, जबकि यह दो विचारधाराओं के बीच का संघर्ष था।  मध्यकाल में यही एक ऐसा युद्ध था, जिसमें मानसिंह को एक रणनीति के तहत इस भुलावे में रखा गया कि अभी युद्ध शेष है और वह अगले मुकाबले का इंतजार ही करता रहा। अधिकांश फारसी लेखकों एवं उनके आधार पर कुछ आधुनिक इतिहास लेखकों ने यहां महाराणा प्रताप की पराजय को स्वीकार किया है। वहीं राजस्थान के इतिहास के स्रोत महाराणा की विजय को स्वीकार करते हैं।  इसके लिए कुछ बातों पर गौर करने की जरूरत है। हल्दी घाटी युद्ध (18 जून, 1576 ई़) के बाद 1577-78 अर्थात् वि़ सं़ 1635 आसोज सुद 5, गुरुवार को महाराणा प्रताप की ओर से जैन मत के तत्कालीन आचार्य ह...

N Ram Destroyed Kasturi’s Legacy Turned The Hindu Into Anti-Hindu Pamphlet Losing Readership

The Hindu, National Newspaper had a tradition and had credibility. It was always Pro Government until N Ram took over patronized by Brahmins and Senior Officials, it was a part of many a persons life, including mine The Hindu National news paper’s legacy ended in 1991 when Kasturi stepped down as Editor. From 1991 it became The Anti Hindu Anti-National news paper. N Ram was a Leftist and pushed the Paper to a leftist agenda which was obviously Anti HinduRise of BJP gave Ram a political target and in TN it was appealing to the major Advertisers. The paper lost its core readers and replacement was inadequate to cover the loss. Social Media destroyed its credibility. While nationally Modi and BJP grew and grew. Age didn’t give wisdom to N Ram. It was understandable when he was young to believe China being a benevolent proletariat experiment to all human beings of world . Forget about political preferences, just being a leftist newsletter in the guise of a newspaper was enough to be a put ...